Wednesday, January 28, 2026
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Homeग्रामीणविश्व आदिवासी दिवस: सतरंगी ध्वज और जोहार के नारों से गूंजा बोड़ेगांव

विश्व आदिवासी दिवस: सतरंगी ध्वज और जोहार के नारों से गूंजा बोड़ेगांव

रैली, सांस्कृतिक नृत्य और सम्मान समारोह के साथ धूमधाम से मना आदिवासी दिवस

ग्राम बोड़ेगांव में विश्व आदिवासी (मूल निवासी) दिवस पारंपरिक उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। गांव की गलियां सतरंगी ध्वज और “जय सेवा जोहार” के नारों से गूंज उठीं। महिलाएं, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में थिरकते हुए रैली में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बूढ़ादेव की पूजा-अर्चना से किया गया। मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्ग श्रीमती सरस्वती बंजारे का स्वागत आदिवासी समाज ने पारंपरिक ढंग से किया। आदिवासी महिलाओं और बालिकाओं ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर संस्कृति की मनमोहक झलक दिखाई।

आदिवासी संस्कृति है मूल संस्कृति : बंजारे

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कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती बंजारे ने आदिवासी संस्कृति को मूल संस्कृति बताते हुए कहा कि इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने समाज में भाईचारा और एकजुटता की भावना बनाए रखने पर बल दिया।

अध्यक्षता कर रहे जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र यादव ने कहा कि समाज की आवश्यकता को देखते हुए शीघ्र ही आदिवासी भवन निर्माण की स्वीकृति मिलेगी। वहीं जनपद सदस्य सुश्री प्रतिभा देवांगन ने भी भवन निर्माण में सहयोग का आश्वासन दिया। सभा को सरपंच पप्पी भूपेंद्र टंडन, उपसरपंच रविप्रकाश ताम्रकार, पंचगण और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी तक इसे पहुंचाने पर विचार रखे।

प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान

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कार्यक्रम में प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बीच-बीच में प्रस्तुत आदिवासी नृत्य और गीतों ने पूरे माहौल को उत्साह और रोमांच से भर दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के वरिष्ठ जेठूराम, पंचम ठाकुर, कल्लू ठाकुर, दौवा ठाकुर, कोषाध्यक्ष कल्याण ठाकुर, सदस्यों अरविंद नेताम, टोपसिंग नेताम, छम्मन नेताम सहित बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बच्चे शामिल रहे। महिला समिति की श्रीमती किरन, सुनिता, रोशी, भोजा, गायत्री, देवकी, रेखा ठाकुर, गंगा, रामकली, रुखमणी सहित अन्य महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक रामकुमार ठाकुर ने किया। अंत में अतिथियों को आदिवासी प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया और कार्यक्रम का समापन “जोहार” के गगनभेदी जयघोष के साथ हुआ।

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