सावन और शिवरात्रि पर उमड़ती है श्रद्धा की बाढ़, भक्तों को बुलाते हैं स्वयंभू भोलेनाथ
ननकट्ठी। धमधा विकासखंड के ग्राम शिवकोकड़ी में स्थित भुईं फोड़ शिवधाम छत्तीसगढ़ की धार्मिक आस्था, भक्ति और चमत्कार का अद्भुत केंद्र है। यह स्थान खास इसलिए भी है क्योंकि यहां स्थापित शिवलिंग को धरती से स्वयं प्रकट हुआ माना जाता है। मान्यता है कि यह शिवलिंग किसी मानव द्वारा स्थापित नहीं किया गया, बल्कि भूमि फटकर शिव का प्राकट्य हुआ था, जिसे ‘भुईं फोड़’ कहा जाता है।
16वीं शताब्दी का दिव्य धाम
स्थानीय ग्रामीणों ने नवभारत पत्रकार आनंद साहू को बताया कि यह शिवलिंग 16वीं शताब्दी से अस्तित्व में है। यह शिवधाम सदियों से आस्था का प्रतीक बना हुआ है। पीढ़ियों से यहां भक्तगण पूजा करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कभी-कभी यहां नाग-नागिन का जोड़ा भी दिखाई देता था, जिसे भगवान शिव की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता था। यह बात जनश्रुतियों में आज भी जीवित है।

2007 में हुआ जीर्णोद्धार, बढ़ी भव्यता और जन आस्था
वर्ष 2007 में इस प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण कर इसे नया रूप दिया गया। तब से यह स्थल एक प्रमुख तीर्थ के रूप में विकसित हुआ है। सावन माह में यहां कांवड़ यात्रियों की भीड़ उमड़ती है, जो दूर-दराज से जल लेकर भोलेनाथ का अभिषेक करने पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए एकत्र होते हैं।
जहाँ मन्नतें पूरी होती हैं, और मन को मिलता है सच्चा सुकून
यह स्थान केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि मनोकामना पूर्ति का धाम भी माना जाता है। श्रद्धालु कहते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुरादें अवश्य पूर्ण होती हैं। यहां की शांति, दिव्यता और वातावरण आत्मा को सुकून प्रदान करता है।












