“शिक्षा के मंदिर को बना दिया गया उपेक्षा का शिकार” — जिला मुख्यालय से महज़ 20 किमी दूर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ननकट्ठी की दुर्दशा देखकर कोई भी व्यक्ति सोचने पर मजबूर हो जाएगा कि क्या वास्तव में शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है! शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ननकट्ठी में कुल 484 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन प्राचार्य का पद रिक्त है। 11 स्वीकृत व्याख्याता पदों में से 9 पर ही शिक्षक, वो भी राजनीति विज्ञान और हिन्दी जैसे प्रमुख विषयों में शिक्षक ही नहीं। 2 सहायक शिक्षक, 1 ग्रंथपाल, 4 भृत्य और 1 चौकीदार का पद भी खाली है। युक्तिकरण के नाम पर भी कोई समाधान नहीं, उल्टे एक कॉमर्स शिक्षक को अन्यत्र भेज दिया गया।

शौचालय बना उपेक्षा का शिकार
सन् 2021-2022 में बालिकाओं के लिए बने 2 लाख की लागत के शौचालय में अब पानी नहीं, टूटे नल है। बालकों के लिए बने शौचालय की हालत और भी बदतर दरवाजे टूटे, बदबूदार माहौल, डर से बच्चे नहीं जाते। शौचालय अब खंडहर में तब्दील हो चुका है।
विद्यालय नहीं, शराबियों का अड्डा बन चुका है परिसर
अक्सर रविवार को मंच पर खुलकर शराबखोरी, बोतलें फोड़ी जाती हैं, छुट्टी के दिनों में विद्यालय का मंच असामाजिक तत्वों का ‘पार्टी प्वाइंट’ बन जाता है। शराब की बोतलें फोड़ी जाती हैं, गंदगी फैलाई जाती है, और आसपास का माहौल पूरी तरह असुरक्षित हो चुका है।
CCTV लगाए… लेकिन सब तोड़ दिए गए
असामाजिक ताकतों की दबंगई का आलम — कैमरे भी नहीं बचे, विद्यालय प्रबंधन द्वारा तीन जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन उन्हें भी तोड़ दिया गया।
कोई निगरानी नहीं, कोई सुरक्षा नहीं — बच्चों की पढ़ाई से अधिक खतरा अब उनके सुरक्षित भविष्य पर है।

75 पौधे लगाए गए, अब नामोनिशान नहीं
मनरेगा के अंतर्गत लगाए गए पौधे और ट्री गार्ड भी तबाह, ग्राम पंचायत द्वारा हर साल पौधारोपण किया जाता है — पिछले वर्ष लगाए गए 75 पौधों में से एक भी जीवित नहीं। ट्री गार्ड चोरी या तोड़े जा चुके हैं, जिससे पर्यावरण जागरूकता पर भी सवाल उठता है। व्यवस्थित रूप से दरवाजे न होने के कारण मैदान में जानवरों की आवाजाही होती है जिससे पौधे को नुकसान पहुंच रहा है।
चार स्कूल, एक मैदान — लेकिन न सुरक्षा, न निगरानी
चार–पांच रास्तों से बेधड़क प्रवेश, कोई रोक-टोक नहीं, ननकट्ठी के एक ही परिसर में स्थित हैं: शासकीय प्राथमिक शाला, पूर्व माध्यमिक शाला, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अर्द्धशासकीय विद्यालय (अब बंद), इनमें प्रवेश के लिए 4-5 खुली दिशाएं, कोई गेट, न कोई निगरानी।
*शिक्षा विभाग की चुप्पी, जनप्रतिनिधियों की चिंता*
समाजजन बोले – अब बहुत हो चुका, हो नियुक्तियाँ, विद्यालय की दुर्दशा को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजजन गंभीर चिंता जता चुके हैं। प्रशासन की चुप्पी असंवेदनशीलता का प्रतीक बन चुकी है। लोगों ने तत्काल प्राचार्य, विषय-शिक्षक, भृत्य व सुरक्षा कर्मी की नियुक्ति, परिसर की मरम्मत और असामाजिक तत्वों से सुरक्षा की मांग की है।












