बगदई माता मंदिर में प्रज्ज्वलित हुई 801 मनोकामना ज्योतियां, आस्था का केंद्र बना पथरिया
ननकट्ठी। समीपस्थ ग्राम पथरिया (डोमा) स्थित बगदई माता मंदिर में चैत्र नवरात्र के अवसर पर 871 मनोकामना ज्योत कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं। सदियों पुरानी मान्यता के अनुसार यहां श्रद्धालु अपनी गुम हुई वस्तुओं, रिश्तों या मवेशियों की प्राप्ति के लिए माता से प्रार्थना करते हैं और नारियल अर्पित करते हैं। यह आस्था इतनी प्रबल है कि भक्तों का मानना है कि बगदई माता की कृपा से उनकी खोई हुई चीजें पुनः प्राप्त हो जाती हैं।
29 वर्षों में तीन से हजार ज्योतियों तक का सफर
ग्राम पथरिया निवासी 64 वर्षीय सेवकराम निषाद के अनुसार, सन् 1995 में यहां पहली बार तीन मनोकामना ज्योतियां प्रज्ज्वलित की गई थीं, जो अब बढ़कर हजार से अधिक हो चुकी हैं। इस वर्ष चैत्र नवरात्र में 871 ज्योत कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं, जिनमें 792 फुलवारी ज्योत और 80 अखंड ज्योत शामिल हैं।

मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
श्रद्धालुओं के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पूर्व गांव के बुजुर्गों ने बरगद के पेड़ के नीचे तीन शिला खंडों को पूजित करना प्रारंभ किया था। कालांतर में इन्हीं शिलाओं को बगदई माता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। वर्ष 2004 में यहां एक चबूतरा और छोटा मंदिर बनाया गया, और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए 4 अप्रैल 2017 को माता की मूर्ति की पुनर्स्थापना की गई।
समाज की भूमिका और मंदिर का विस्तार
मंदिर संचालन का कार्य वर्ष 2000 से गठित निषाद समाज समिति द्वारा किया जा रहा है, जिसमें अध्यक्ष बाबूलाल निषाद, सचिव आशीष पारकर सहित कई समाजसेवी जुड़े हैं। इस मंदिर के लिए ग्राम निवासी तोरण लाल साहू ने वर्ष 2005 में 25 डिसमिल जमीन दान की थी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां चार ज्योति कक्ष, पेयजल व्यवस्था, और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
नवमी को होगा ज्योत विसर्जन
नवरात्रि में फुलवारी ज्योतों का विसर्जन अष्टमी के हवन-पूजन के बाद नवमी की शाम से प्रारंभ होकर देर रात तक चलेगा। इसके लिए मंदिर परिसर में विशेष विसर्जन कुंड बनाया गया है।












