विवाह झांकी पर पुष्पवृष्टि, भक्तों ने भक्ति गीतों पर झूमकर मनाया उत्सव
संगीतमय भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सागर, व्यास महाराज ने किया प्रसंगों का जीवंत वर्णन
ननकट्ठी।
बोडेगांव के हृदय स्थल बाजार चौक में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन का दृश्य देखते ही बनता था। जब भगवान श्रीकृष्ण दूल्हा बनकर बैलगाड़ी में सवार होकर बारात लेकर आए और माता रुक्मणी संग विवाह का शुभ प्रसंग धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। पूरा वातावरण जय-जयकार और भक्ति के सुरों से गूंज उठा।

लिमतरा से पधारे कथावाचक आचार्य व्यास निरंजन महाराज ने कथा में रास पंचाध्यायी का गहन वर्णन करते हुए कहा कि महारास के पांच अध्याय भागवत के पंचप्राण हैं। इन्हें भावपूर्वक गाने वाला भक्त भवसागर से पार होकर वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त कर लेता है।
झांकी ने मोहा मन
श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया। वरमाला के समय भक्तों ने जमकर पुष्पवर्षा की और भक्ति गीतों पर नाचते-गाते आनंदित हुए। कथा के दौरान कृष्ण जन्म से लेकर कंस वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्याध्ययन, कालयवन वध, उधव-गोपि संवाद, द्वारका स्थापना और अंत में रुक्मणी विवाह तक के प्रसंगों का संगीतमय वृतांत सुनाया गया।
रुक्मणी का अटल संकल्प

व्यास महाराज ने बताया कि रुक्मणी के भाई रुक्मि ने उनका विवाह शिशुपाल से तय किया था, किंतु रुक्मणी ने संकल्प लिया कि वे केवल श्रीकृष्ण को ही जीवनसाथी बनाएंगी। अंततः भगवान द्वारिकाधीश ने उनके सत्य संकल्प को पूर्ण कर रुक्मणी को अपनी पटरानी का स्थान दिया। इस प्रसंग का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने से कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
कथा स्थल पर हजारों भक्तगण श्रद्धा व उत्साह के साथ मौजूद रहे। रुक्मणी विवाह महोत्सव ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथावाचक ने कहा कि जो भक्त इस विवाह उत्सव में शामिल होते हैं, उनकी वैवाहिक समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और जीवन में सौभाग्य स्थायी होता है।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में सिन्हा परिवार, जय माता दी ग्रुप और क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा।











