Sunday, February 1, 2026
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चारागाह बना ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का केंद्र

मनरेगा के तहत ननकट्ठी में तैयार चारागाह में सब्जी उत्पादन और मछली पालन से मिल रहा लाभ, महिलाओं को मिला रोजगार

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दुर्ग जिले के ग्राम ननकट्ठी में शिवनाथ नदी के किनारे मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत तैयार किया गया चारागाह अब गांव की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनता जा रहा है। लगभग चार एकड़ बंजर भूमि को समतलीकरण, फेंसिंग, ट्यूबवेल, डबरी निर्माण और पौधरोपण के ज़रिए उपजाऊ बनाया गया। शासन द्वारा लाखों रुपये की लागत से विकसित यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष योजना का हिस्सा रहा है।

हालांकि शुरुआत में शासन व पंचायत को आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया, लेकिन अब हरिओम, कात्यायनी व सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की मेहनत रंग ला रही है। इन समूहों की महिलाएं अब इस चारागाह में सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं, जिससे उन्हें आय का एक स्थायी साधन मिला है। बरबटी, भिंडी, बैंगन, लौकी, गोभी, नवलगोल, सेमी जैसी फसलें तो ली ही जा रही हैं, साथ ही गर्मियों में चेंच, अमारी, चौलाई, कांदा, जरी, करमत्ता जैसी मौसमी सब्जियां भी उगाई जा रही हैं।

कात्यायनी समूह की सदस्य श्रीमती ललिता पटेल बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद सब्जियों की बिक्री से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है, जिससे घर की आमदनी में इज़ाफा हुआ है। वहीं हरिओम स्व-सहायता समूह की महिला सदस्य श्रीमती उषा साहू ने बताया कि पहले मजदूरी के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब समूह में जुड़ने के बाद सब्जी उत्पादन से ही पर्याप्त आमदनी हो जाती है, जिससे बाहर जाने की आवश्यकता नहीं रह गई है और परिवार की आय भी बढ़ी है।

मनरेगा के तहत निर्मित डबरी में मछली पालन की भी योजना बनाई गई है, जिससे महिलाओं की आमदनी में और वृद्धि की संभावना है। ग्राम पंचायत द्वारा चारागाह परिसर में लगभग 500 पौधे रोपे गए हैं, जिनमें अमरूद, जामुन, आंवला जैसे फलदार तथा गुलमोहर, करंज, अमलतास व नीम जैसे छायादार पौधे शामिल हैं। अब ये पौधे बड़े हो चुके हैं और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं।

ग्राम ननकट्ठी का यह चारागाह आज न केवल महिलाओं के लिए आय का स्रोत है, बल्कि यह ग्रामीण विकास और योजना के सफल क्रियान्वयन की मिसाल भी बन गया है।

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