शिवनाथ नदी किनारे स्थित ‘सुखरा गुड़ा’ में तीन साल में होती है विशेष पूजा, सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल
ननकट्ठी (जिला दुर्ग)।
ग्राम ननकट्ठी के पथरिया घाट में स्थित शिवनाथ नदी के किनारे ‘सुखरा गुड़ा’ नामक स्थान पर मामा-भांजा की रहस्यमयी पत्थरनुमा मूर्तियाँ आज भी ग्रामीणों की आस्था का केंद्र बनी हुई हैं। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी निषाद समाज द्वारा पूरे श्रद्धा से निभाई जा रही है।

ग्रामवासियों के अनुसार, इन मूर्तियों की स्थापना नदी किनारे खुले स्थान पर हुई थी। हाल ही में निषाद समाज के सहयोग से मामा की मूर्ति पर मंदिर का निर्माण किया गया, जिसका कलशारोहण 13 जून 2025 को संपन्न हुआ। भांजा की मूर्ति के चबूतरे को भी विस्तार दिया गया है।
अद्भुत लोककथा और नदी में डूबने से जुड़ी कहानी
वरिष्ठ ग्रामीण मंथीर लाल निषाद व योगेश निषाद बताते हैं कि सदियों पूर्व एक मामा और भांजा नदी पार करते समय लकड़ी की पटरी से फिसल गए। भांजा डूबने लगा और चिल्लाया — “मामा, मैं डूब रहा हूं!” मामा ने उसे बचाया, और मान्यता है कि उसी क्षण दोनों पत्थर में परिवर्तित हो गए। यही कारण है कि इस घाट को ‘सुखरा गुड़ा’ कहा जाता है — सुखा हुआ लकड़ी का टुकड़ा जिससे घाट पार किया गया था।

तीन वर्ष में एक बार होती है विशेष पूजा
परिक्षेत्रीय अध्यक्ष टोपराम निषाद के अनुसार, हर तीन साल में आषाढ़ मास के शनिवार को इस स्थल पर विशेष पूजा का आयोजन होता है। इस वर्ष यह आयोजन 14 जून 2025 को हुआ, जिसमें आसपास के 150 से अधिक निषाद परिवारों समेत कुल 600 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया और चावल का प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर निर्माण में समाज की एकजुटता
समाज के सचिव डॉ. शगुन निषाद ने बताया कि दानदाताओं की सहायता से मंदिर निर्माण कार्य संपन्न हुआ है। उनका कहना है, “यह स्थान सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं अवश्य फलदायी होती हैं।”










