स्वाद, सेहत और परंपरा का अनमोल संगम
गांव-देहात में जब किसी को स्वादिष्ट भोजन खिलाना होता है, तो भाटा (बैंगन) का भरता और टमाटर (पताल) की चटनी ज़रूर परोसी जाती है। यह व्यंजन न केवल जल्दी पचता है, बल्कि इसमें जब कुछ नए मसाले या सामग्री जोड़ दिए जाएं, तो स्वाद और आनंद दोनों दुगना हो जाता है।

हम रोज़ रोटी, दाल, भात और साग खाते ही हैं, लेकिन जब उसके साथ भाटा का भरता और टमाटर की चटनी मिल जाए, तो भोजन का मज़ा ही कुछ और होता है। भाटा, जिसे बैंगन या भटा भी कहा जाता है, दिल, हड्डियों और पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसे आग में भूनकर, छिलका हटाकर उसके गूदे को नमक, मिर्च और धनिया डालकर मसलते हैं और भरता तैयार करते हैं। इसे चाव से भात, बासी या रोटी के साथ खाया जाता है।
अगर भरते में थोड़ा और स्वाद चाहिए, तो इसमें प्याज़, जीरा या लहसुन का तड़का देकर तेल में थोड़ा तल सकते हैं। गोल बैंगन (गोलिंदा भांटा) का तो कहना ही क्या! यह सब्ज़ी से कहीं अधिक स्वादिष्ट होता है। आज जब गैस चूल्हे ने जगह ले ली है, तो भरता बनाने का पारंपरिक तरीका कम होता जा रहा है, और इसका स्वाद भी अब केवल यादों में सिमटता जा रहा है।
वहीं टमाटर, जिसे पताल, बंगाली या लाल सब्ज़ी भी कहते हैं, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद करता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन C और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो आंखों, छाती और त्वचा के लिए लाभकारी हैं। पताल की चटनी अगर सिल-बट्टे पर पिसी हुई हो, तो फिर स्वाद पूछिए मत! इसमें नमक, मिर्च, पुदीना और धनिया मिलाकर ताज़ा-ताज़ा परोस दें, तो लोग उंगलियां चाटते रह जाते हैं।
दरअसल, “चटनी” शब्द ही “चांटना” से निकला है — यानी जिसे बार-बार चाट कर खाने का मन करे। अचार, अथान या कटुवी चटनी से बिल्कुल अलग, भाटा के भरते और टमाटर की चटनी का स्वाद और सेहत पर असर — दोनों ही बेमिसाल हैं।











