अष्टमी पर हवन-पूजन के साथ उत्साह का माहौल

ग्राम ननकट्ठी में चैत्र नवरात्रि का समापन नवमी के दिन रविवार को बड़े तरिया में जोत जवांरा के विसर्जन के साथ हुआ। इस अवसर पर गांव के हनुमान मंदिर (महामाया देवी), चंडी मंदिर और शीतला मंदिर में श्रद्धालु भक्तों ने माता रानी के प्रति अपनी आस्था और विश्वास के प्रतीक के रूप में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित किए थे। नवरात्रि के अंतिम दिन माता रानी के जोत जवांरा को पारंपरिक जस गीतों की धुन पर नाचते हुए विदाई दी गई।
विसर्जन यात्रा सबसे पहले हनुमान मंदिर (मां महामाया देवी) से शुरू हुई, जो बाजार चौक और बावली चौक होते हुए चंडी माता मंदिर पहुंची। इसके बाद शोभायात्रा बड़े तरिया के समीप मां शीतला देवी मंदिर तक गई, जहां भक्तों ने नम आंखों से माता रानी के आस्था के प्रतीक जोत जवांरा को अंतिम विदाई दी। इस मौके पर माताएं और बहनें बड़ी संख्या में शामिल हुईं, जिससे कार्यक्रम में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इससे पहले शनिवार को अष्टमी के अवसर पर गांव के मंदिरों में हवन-पूजन का विशेष आयोजन हुआ। अष्टमी के महत्व को देखते हुए सुबह से देर शाम तक हनुमान मंदिर, शीतला मंदिर, चंडी मंदिर और दुर्गा मंदिर में हवन, पूजन और कन्या भोज के कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न हुए। नवरात्रि के नौ दिनों तक इन मंदिरों में भक्तों ने मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कर माता रानी से सुख-समृद्धि की कामना की। अष्टमी के दिन हुए विशेष अनुष्ठानों ने गांव में धार्मिक माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
ग्राम ननकट्ठी में चैत्र नवरात्रि का यह उत्सव हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और एकता का प्रतीक बना रहा। जोत जवारा का विसर्जन और हवन-पूजन जैसे आयोजनों ने माता रानी के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा को एक बार फिर उजागर किया।












